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रायचंदवाला के अंकुर सिंह फौगाट बने सेना में लेफ्टिनेंट....

जींद : गांव रायचंद वाला में जन्मे अंकुर सिंह फौगाट सेना में अधिकारी बन गए हैं, जिसके बाद उनके घर बधाई देने वालों का तांता लग गया। अंकुर के पिता सत्यवान सिंह राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय बुआना में प्राचार्य और माता गृहिणी हैं। अंकुर के पिता ने बताया कि बेटे ने दसवीं की परीक्षा इंडस पब्लिक स्कूल से पास की थी। जिसके बाद दिल्ली यूनिवर्सिटी में बीएससी के प्रथम वर्ष के छात्र थे। पढ़ाई के दौरान जनवरी 2015 में आफिसर प्रशिक्षण अकादमी गया बिहार में चयन हो गया था। उसके बाद 8 दिसंबर को आफिसर प्रशिक्षण अकादमी गया बिहार से कमीशन पास आउट हुए। उन्होंने बताया कि अंकुर टीईएस-32 बैच में नियुक्त हुए थे। अब उन्हें सिग्नल कोर में लेफ्टिनेंट पद मिला है। हसला के राज्य उपप्रधान राजबीर सिंह रेढू ने भी सत्यवान व पूरे परिवार को बधाई दी। #indianarmy

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गाँव बहजादका पोस्ट पिलोना तहसील मवाना जिला मेरठ उत्तर प्रदेश से अपने जाट भाई #शिवम_राणा पुत्र श्री Dr. विक्रांत राणा जी
शिवम का लेफ्टिनेंट पद पर चयन हुआ है ,इनके उज्जवल भविष्य की कामना करते है 🙏आगे भी अपने माँ बाप का सर ऊंचा करते हुए देश के झंडे🇮🇳 की रक्षा करेंगे 🙏🙏 #indianarmy

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#प्रणाम_शहीदा_नू
मनोज धायल इण्डियन आर्मी
गाँव - चिड़ियाँ गान्धी
तहसील -भादरा का मनोज धायल भारतीय सेना में On Duty शहीद का शव आज तिरगें मे गाँव चिड़िया गान्धी गाँव में भारतीय सेना लेकर पहुँची।।।।।।।।।।
नाज करते ऐसे वीरो पर जो देश की हिफाजत करते हुए शहीद होते हैं।।।।।।।।।

शहीद मनोज धायल को जय हिन्द 🙏🙏🙏
#प्रणाम_शहीदा_नू
Proud to be a JAAT #indianarmy

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जर अनूप सिंह गहलोत (MVC)
महावीर चक्र (मरणोपरांत )
4 दिसंबर 1971 , भारत पाक युद्ध , पुरवू मोर्च ,चटगाँव ,बांग्लादेश
जन्म -19 सितंबर 1940 ,नांगलोई जट ,दिल्ली
माताजी - श्रीमती खजानी देवजी , पिताजी - लेo कर्नल दलेल सिंह गहलोत
सेना में कमीशन ( अधिकृत) -11 दिसम्बर 1962 ,3 डोगरा रेजिमेंट

मेजर अनूप सिंह 1971 के भारत पाक युद्ध मे 3 डोगरा रेजिमेंट के साथ पूर्वी मोर्चे पर सम्पूर्ण चोदहग्राम - लक्ष्म मार्ग पर मार्ग रोक का लक्ष्य लिए तैनात थे । पाकिस्तान की 23 पंजाब रेजिमेंट की टेलीफोन लाइनों को अवरोधित करने के बाद ,उन्होंने दो भागों में बॉट कर ,शत्रु की दो कंपनी को घेर लिया । आत्मसमर्पण असहमति पर भीषण लड़ाई प्रारंभ हो गयी। शत्रु ने मेजर अशोक भान पर गोलीबारी शुरू करदी । अपने साथी की स्थिति को सदृढ़ करने के लिए मेजर अनूप सिंह अपनी टुकड़ी का नेतृत्व करते हुए दुश्मन पर टूट पड़े । उनको खुले में देखकर और कमजोर जान अर शत्रु उनपर आगे व पीछे से हमला उग्र हमला करने लगा । मेजर अनूप सिंह युद्ध कौशल संयम बहादुरी का परिचय देते हुए अपने सैनिकों का मनोबल बढ़ाते रहे तथा शत्रुओं को निर्णायक छति पहुचाई । शत्रु छोटे समूह में भागने लगा । नजदीकी मुड़भेड़ आरम्भ हुई , गहरे घावों ने उन्हें लहूलहान कर दिया परन्तु शत्रु की पराजय व लक्ष्य की प्रप्ति तक वह लड़ते हुए वीर गति को प्राप्त हो हुए । उनकी अद्बुत नेतृत्व छमता व अदम्य साहस के लिए उन्हें मरणोपरांत महावीर चक्र सके सम्मान . #indianarmy

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